नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2025 — देश की सबसे बड़ी आईटी कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) ने हाल ही में सामने आई नौकरी कटौती से जुड़ी खबरों पर प्रतिक्रिया दी है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि वह किसी तय संख्या के अनुसार कर्मचारियों को नहीं निकाल रही है, बल्कि यह प्रक्रिया सामान्य प्रदर्शन समीक्षा और व्यापार आवश्यकताओं के अनुरूप चल रही है।
क्या हो रही है छंटनी?
पिछली तिमाही में TCS के कर्मचारियों की संख्या में लगभग 20,000 की कमी देखी गई थी, जिससे यह चर्चा तेज हो गई कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी कर रही है। कंपनी प्रबंधन ने बताया कि यह कटौती किसी एक झटके में नहीं की गई, बल्कि विभिन्न परियोजनाओं के पूरा होने और पुनर्संरचना की प्रक्रिया के दौरान हुई है।
TCS के मानव संसाधन प्रमुख सुदीप कुनुंमल ने कहा कि कंपनी किसी “टारगेट नंबर” को हासिल करने के लिए छंटनी नहीं कर रही है। उनका कहना है कि यह एक सतत प्रक्रिया है, जहां कर्मचारी प्रदर्शन, कौशल और परियोजनाओं की आवश्यकता के आधार पर पुनर्स्थापित या मुक्त किए जा सकते हैं।
आगे की योजना
कुनुंमल ने यह भी बताया कि यदि किसी कर्मचारी को अन्य परियोजनाओं में पुनः स्थानांतरित करना संभव नहीं होता, तभी उसे हटाया जाता है। उन्होंने कहा, “हम किसी संख्या का पीछा नहीं कर रहे हैं। यह केवल प्रदर्शन और व्यावसायिक आवश्यकता पर आधारित प्रक्रिया है।”
साथ ही, कंपनी ने यह भी घोषणा की है कि 1 सितंबर से अधिकांश कर्मचारियों को वेतन वृद्धि दी गई है। लगभग 80 प्रतिशत कर्मचारियों को इस साल सैलरी हाइक मिला है, जिससे संकेत मिलता है कि कंपनी स्थिरता बनाए रखना चाहती है।
आईटी सेक्टर पर दबाव
विशेषज्ञों का कहना है कि पूरे आईटी उद्योग में पिछले कुछ महीनों से चुनौतियाँ बनी हुई हैं। अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों की परियोजनाओं में देरी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का बढ़ता प्रभाव और लागत नियंत्रण के प्रयास कंपनियों पर असर डाल रहे हैं।
इन परिस्थितियों में, TCS और अन्य प्रमुख आईटी कंपनियाँ अपने संसाधनों का पुनर्मूल्यांकन कर रही हैं ताकि दक्षता और लाभप्रदता बनाए रखी जा सके।
निष्कर्ष
हालाँकि TCS ने छंटनी की खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश की गई अफवाह बताया है, लेकिन यह साफ है कि कंपनी प्रदर्शन-आधारित समीक्षा और तकनीकी बदलावों के दौर में अपने कार्यबल को संतुलित कर रही है। फिलहाल कंपनी का जोर “गुणवत्ता पर ध्यान और दीर्घकालिक स्थिरता” पर है, न कि व्यापक छंटनी पर।

