नई दिल्ली, नवम्बर 2025: उद्योगपति हर्ष गोयनका द्वारा सोशल मीडिया पर उठाए गए एक सवाल ने देश की टेक्नोलॉजी निर्भरता पर नई बहस छेड़ दी है। गोयनका ने पूछा था कि अगर अमेरिका भारत में Google, Instagram, X (Twitter), Facebook या ChatGPT जैसी सेवाएँ बंद कर दे तो देश का “प्लान-B” क्या होगा?
इस सवाल पर प्रतिक्रिया देते हुए Zoho Corporation के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने कहा कि भारत को केवल ऐप-स्तर पर नहीं, बल्कि तकनीकी आधारभूत ढांचे (core technology infrastructure) में आत्मनिर्भर बनना होगा।
भारत को चाहिए “10 साल का टेक्नोलॉजी रेज़िलिएंस मिशन”
वेम्बू ने अपने बयान में कहा कि भारत की निर्भरता सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स तक सीमित नहीं है।
उन्होंने कहा,
“अगर अमेरिका हमें इन सेवाओं तक पहुँच से वंचित करता है, तो असली चुनौती सॉफ्टवेयर नहीं बल्कि उन मूल तकनीकों की है जिन पर ये सब आधारित हैं — जैसे ऑपरेटिंग सिस्टम, चिप्स और फाउंड्रीज़।”
उन्होंने सुझाव दिया कि भारत को एक “10-साल का नेशनल मिशन फॉर टेक्नोलॉजी रेज़िलिएंस” शुरू करना चाहिए, जिससे देश हार्डवेयर से लेकर सॉफ्टवेयर तक हर स्तर पर आत्मनिर्भर बन सके।
डिजिटल निर्भरता पर चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था वर्तमान में अमेरिकी टेक कंपनियों पर गहराई से निर्भर है।
अगर कभी किसी राजनीतिक या रणनीतिक कारण से इन सेवाओं पर रोक लगाई जाती है, तो देश के संचार, ई-कॉमर्स, शिक्षा और डेटा-साझाकरण तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
मुख्य चुनौतियाँ
- उच्च लागत: चिप निर्माण और हार्डवेयर उत्पादन के लिए भारी निवेश की आवश्यकता होगी।
- तकनीकी क्षमता: उन्नत ऑपरेटिंग सिस्टम और प्रोसेसर निर्माण के लिए वैश्विक स्तर की विशेषज्ञता की जरूरत है।
- उपभोक्ता भरोसा: भारतीय उपयोगकर्ता विदेशी प्लेटफार्म्स के आदी हैं, ऐसे में घरेलू विकल्पों पर विश्वास बनाना एक चुनौती होगी।
स्वदेशी समाधान की ओर
भारत में पहले से ही Zoho, TCS, Infosys, HCL जैसी कंपनियाँ टेक्नोलॉजी क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर कार्य कर रही हैं।
वेम्बू का कहना है कि अब भारत को “सिर्फ सेवाएँ देने वाला देश” नहीं बल्कि “टेक्नोलॉजी निर्माता” राष्ट्र बनने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
निष्कर्ष
श्रीधर वेम्बू का बयान इस बात की ओर संकेत करता है कि आने वाले समय में डिजिटल आत्मनिर्भरता (Digital Self-Reliance) भारत की रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल होनी चाहिए।
उनका संदेश स्पष्ट है —
“हमें सिर्फ ऐप्स के विकल्प नहीं, बल्कि अपनी खुद की तकनीकी जड़ों को मजबूत करना होगा। तभी भारत वास्तव में आत्मनिर्भर डिजिटल राष्ट्र बन सकेगा।”

