इस धनतेरस पर जहां एक ओर लोग सोना खरीदने की तैयारी में हैं, वहीं वित्तीय विशेषज्ञों ने एक चौंकाने वाली चेतावनी दी है। उनका कहना है कि हाल ही में सोने की जो कीमतों में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है, उसका बड़ा हिस्सा वास्तव में सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों के कारण नहीं, बल्कि रुपये के कमजोर होने की वजह से है।
रुपये के अवमूल्यन का असर
वित्तीय सलाहकारों के अनुसार, भारत में सोना डॉलर में खरीदा जाता है, और जब रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होता है, तो सोने की कीमतें स्वतः बढ़ जाती हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी ने 2020 में 500 डॉलर का सोना खरीदा था जब डॉलर की दर 73 रुपये थी, तो उसकी कीमत लगभग 36,500 रुपये होती। लेकिन अब यदि डॉलर की दर 88 रुपये हो गई है, तो वही सोना करीब 44,000 रुपये का हो जाएगा। यानी करीब 20 प्रतिशत का लाभ केवल रुपये के अवमूल्यन से आया, सोने की वास्तविक कीमत में उतनी वृद्धि नहीं हुई।
संभावित खतरा भी मौजूद
विशेषज्ञों ने यह भी चेताया है कि यदि भविष्य में रुपया मजबूत होता है और डॉलर की दर घटती है, तो निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उदाहरण के लिए, यदि डॉलर की दर 88 से घटकर 84 रुपये हो जाए और अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमत स्थिर रहे, तो निवेशकों को लगभग 4.5 प्रतिशत का नुकसान हो सकता है।
सोने की कीमत किन बातों पर निर्भर करती है
भारत में सोने की कीमत दो प्रमुख कारकों पर निर्भर करती है —
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें (डॉलर में)
- रुपये और डॉलर के बीच विनिमय दर
वर्तमान स्थिति में दोनों ही कारक बहुत अनुकूल नहीं दिख रहे हैं। सोना पहले से ही रिकॉर्ड ऊंचाई पर है, और अगर आने वाले महीनों में रुपया मजबूत होता है, तो सोने के दाम स्थिर या गिर भी सकते हैं।
इस धनतेरस पर खरीदारों के लिए सलाह
धनतेरस पर सोना खरीदना भारतीय परंपरा का हिस्सा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि इस साल खरीदारी में थोड़ी सावधानी बरतनी चाहिए। एकमुश्त बड़ी खरीदारी करने की बजाय धीरे-धीरे निवेश करना बेहतर रहेगा। साथ ही, निवेशक सोने के बजाय सोने से जुड़े अन्य विकल्पों जैसे गोल्ड ईटीएफ या डिजिटल गोल्ड पर भी विचार कर सकते हैं।

