भुज/नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को भुज, गुजरात में आयोजित एक कार्यक्रम में भारत द्वारा विदेशी शिपिंग कंपनियों को किए जा रहे भारी भुगतान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भारत हर साल लगभग $75 बिलियन यानी ₹6 लाख करोड़ विदेशी शिपिंग कंपनियों को शिपिंग सेवाओं के लिए भुगतान करता है, जो देश के संपूर्ण रक्षा बजट के बराबर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि यह विदेशी निर्भरता भारत की आर्थिक संप्रभुता के लिए खतरा है और इसे कम करने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।
पीएम मोदी के बयान: भारत में शिपबिल्डिंग की क्षमता और अवसर
प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में कहा:
“भारत एक समय में वैश्विक समुद्री शक्ति था और दुनिया का सबसे बड़ा शिपबिल्डिंग केंद्र भी। लेकिन स्वतंत्रता के बाद हमारी नीतियों ने इस क्षमता को नजरअंदाज किया। आज हम विदेशी जहाजों पर भारी राशि खर्च करते हैं, जबकि हमारे पास खुद की क्षमता है। अगर पिछले सात दशकों में इस खर्च का एक छोटा सा हिस्सा भारत की शिपबिल्डिंग में निवेशित किया जाता, तो आज दुनिया भारतीय जहाजों का उपयोग कर रही होती।“
उन्होंने यह भी कहा कि वर्तमान सरकार शिपबिल्डिंग क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और निवेश बढ़ाने के लिए विभिन्न कदम उठा रही है, ताकि भारत के पास अपनी शिपिंग क्षमता मजबूत हो और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम हो।
शिपबिल्डिंग पर भारत की वर्तमान स्थिति
- भारत वर्तमान में सालाना लगभग ₹6 लाख करोड़ की राशि विदेशी शिपिंग कंपनियों को भुगतान करता है।
- यह राशि देश के संपूर्ण रक्षा बजट के बराबर है।
- पिछले दशक में भारतीय नौसेना में शामिल किए गए 40 से अधिक जहाज और पनडुब्बियाँ भारत में निर्मित हैं, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं।
- लेकिन नागरिक और व्यापारिक शिपिंग में भारत अभी भी विदेशी जहाजों पर निर्भर है।
प्रधानमंत्री मोदी ने इस संदर्भ में सरकार द्वारा बड़े जहाजों को इन्फ्रास्ट्रक्चर का दर्जा देने के निर्णय का उल्लेख किया, जिससे शिपबिल्डिंग के लिए आसान और सस्ता वित्तपोषण संभव हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इससे भारत की शिपबिल्डिंग उद्योग को नया जीवन मिलेगा और विदेशी निर्भरता कम होगी।
‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत उठाए गए कदम
प्रधानमंत्री मोदी ने शिपबिल्डिंग उद्योग को पुनर्जीवित करने और आत्मनिर्भर बनाने के लिए निम्नलिखित कदमों की घोषणा की:
- बड़े जहाजों को अवसंरचना (Infrastructure) का दर्जा देना – इससे निर्माण कंपनियों को आसान और सस्ता वित्तपोषण मिलेगा।
- वित्तीय प्रोत्साहन – घरेलू शिपबिल्डिंग कंपनियों को ऋण और अनुदान के माध्यम से सहायता दी जाएगी।
- तकनीकी क्षमता बढ़ाना – भारतीय नौसेना और वाणिज्यिक जहाजों के निर्माण में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल।
- स्थानीय सामग्रियों का उपयोग – जहाज निर्माण में आयातित सामग्री पर निर्भरता कम करना और स्थानीय उद्योग को बढ़ावा देना।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि यदि ये कदम सफलतापूर्वक लागू किए गए, तो भारत शिपिंग क्षेत्र में वैश्विक शक्ति बन सकता है और देश के लिए आर्थिक लाभ भी सुनिश्चित होगा।
शिपबिल्डिंग में आत्मनिर्भरता का महत्व
विशेषज्ञों के अनुसार, शिपबिल्डिंग उद्योग में आत्मनिर्भरता न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है।
- विदेशी जहाजों पर भारी भुगतान से मुद्रा का बहिर्वाह बढ़ता है।
- घरेलू शिपबिल्डिंग में निवेश से रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
- आत्मनिर्भर शिपिंग क्षमता होने से आपातकालीन और रक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना आसान हो जाता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की क्षमता और प्रतिभा इस क्षेत्र में पर्याप्त है; केवल उचित नीतिगत प्रोत्साहन और वित्तीय मदद की आवश्यकता है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री मोदी की यह पहल भारत को शिपिंग उद्योग में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यदि यह योजना सफल होती है, तो भारत न केवल विदेशी भुगतान को कम करेगा, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी मजबूत स्थिति हासिल करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने जनता और उद्योगपतियों से आग्रह किया कि वे इस दिशा में सहयोग करें और भारतीय शिपबिल्डिंग उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए प्रयासरत रहें।

