ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने अपनी भारत यात्रा के दौरान कहा कि भारत आने वाले कुछ वर्षों में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि इस आर्थिक यात्रा में ब्रिटेन एक “आदर्श साझेदार” बनने के लिए पूरी तरह तैयार है।
स्टारमर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुई बैठक के बाद कहा कि भारत और ब्रिटेन के बीच संबंध अब एक नए युग में प्रवेश कर रहे हैं, जहाँ व्यापार, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में सहयोग को और गहराई मिलेगी।
भारत-यूके संबंधों में नई ऊर्जा
भारत और ब्रिटेन के बीच चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर बातचीत अंतिम चरण में पहुँच चुकी है। दोनों देशों का लक्ष्य है कि यह समझौता निकट भविष्य में लागू हो जाए, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि हो।
वर्तमान में भारत और ब्रिटेन के बीच लगभग 56 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है, और इसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रधानमंत्री स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन भारतीय वस्त्र, औद्योगिक उत्पाद, और तकनीकी सेवाओं के लिए एक बड़ा बाजार बनेगा। वहीं भारत ब्रिटिश शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और ऊर्जा प्रौद्योगिकी में निवेश के अवसर खोलेगा।
नेताओं के बयान
कीर स्टारमर ने कहा —
“भारत न केवल एशिया, बल्कि पूरी दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था है। ब्रिटेन इस यात्रा में भारत का भरोसेमंद और स्वाभाविक सहयोगी बनेगा।”
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा —
“भारत और ब्रिटेन के संबंध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत मजबूत हैं। अब हमारा फोकस नवाचार, हरित ऊर्जा और कौशल विकास पर है।”
रणनीतिक सहयोग और वैश्विक दृष्टिकोण
दोनों देशों ने संयुक्त रूप से इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक मंचों पर सहयोग को और सशक्त बनाया जाएगा।
ब्रिटेन ने भारत के संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्य बनने के दावे का समर्थन किया।
इसके अलावा, दोनों पक्षों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), साइबर सुरक्षा, और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे उभरते क्षेत्रों में संयुक्त निवेश और अनुसंधान की रूपरेखा पर भी सहमति जताई।
आर्थिक दृष्टि से बड़ा कदम
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, भारत की तेज़ आर्थिक वृद्धि और स्थिर नीतियों ने उसे वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना दिया है।
ब्रिटेन इस साझेदारी के माध्यम से भारतीय बाजारों में गहराई से प्रवेश करना चाहता है, जबकि भारत ब्रिटिश तकनीकी विशेषज्ञता और शिक्षा मॉडल से लाभ उठाना चाहता है।
निष्कर्ष
भारत और ब्रिटेन के बीच बढ़ते आर्थिक और रणनीतिक संबंध दोनों देशों के लिए लाभदायक साबित हो सकते हैं।
भारत जहां अपने आर्थिक विकास की गति को और तेज़ करना चाहता है, वहीं ब्रिटेन इस नई साझेदारी के ज़रिए वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखना चाहता है।
यह मुलाकात दोनों देशों के लिए एक नए आर्थिक और कूटनीतिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।

