कीव, यूक्रेन। रूस ने यूक्रेन की राज्य-नेटवर्क गैस सुविधाओं पर एक अभूतपूर्व प्रहार किया है, जिसे इस युद्ध के दौरान अब तक का सबसे बड़ा हमला कहा जा रहा है। इस हमले में लगभग 35 मिसाइलें और 60 ड्रोन इस्तेमाल किये गए, जिनका निशाना मुख्य रूप से खार्किव और पोल्तावा क्षेत्रों में स्थित गैस उत्पादन एवं प्रसंस्करण इकाइयाँ थीं।
हमला एवं क्षति की जानकारी
- गैस कंपनी Naftogaz के सीईओ ने बताया कि इस हमले में कई इंस्टालेशन को गंभीर क्षति हुई है, कुछ तो ऐसी भी कि उन्हें ‘क्रिटिकल’ कहा गया है।
- रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस हमले में न केवल ऊर्जा और गैस नेटवर्क को निशाना बनाया गया, बल्कि युद्ध-औद्योगिक परिसरों पर भी हमला किया गया।
- यूक्रेन की एयर फोर्स का दावा है कि रूसी सेना ने इस हमले में 381 ड्रोन और 35 मिसाइलें भेजी थीं।
- न सिर्फ उपकरणों को नुकसान पहुंचा, बल्कि बिजली कटौती और गैस आपूर्ति बाधित हो गई है।
राजनीतिक एवं मानव-सामाजिक असर
- यूक्रेन सरकार ने इस हमले की निंदा करते हुए कहा कि यह सीधी हमीदारी (deliberate terrorism) है, जिसका उद्देश्य नागरिकों को सर्दियों में गर्मी से वंचित करना है।
- सरकार का दावा है कि यह हमला किसी सैन्य रणनीति से प्रेरित नहीं था, बल्कि शीतकालीन समय में ऊर्जा प्रणाली को बाधित करने के उद्देश्य से किया गया।
- इस हमले से पोल्तावा में एक 8 वर्ष की बच्ची और दो महिलाएं घायल हुई हैं, और एक ऐतिहासिक चर्च की खिड़कियाँ टूट गईं।
- यूक्रेन ने इसके प्रत्युत्तर में रूसी तेल रिफाइनरी और और तकनीकी संस्थाओं पर जवाबी ड्रोन हमले भी किये हैं।
आगे की संभावनाएँ
- जैसे-जैसे सर्दी के मौसम की ओर बढ़ा जाता है, ऊर्जा आपूर्ति संकट और लोगों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
- यूक्रेन सरकार ठोस रणनीति बना सकती है कि कैसे राज्य ऊर्जा संरचनाओं को सुरक्षा प्रदान की जाए।
- अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी दबाव बढ़ सकता है कि इस तरह के नागरिक लक्षित हमलों को युद्ध अपराध माना जाए।
यह हमला रूस-यूक्रेन संघर्ष की एक नई और गंभीर कड़ी है, जिसमें युद्ध की पद्धति केवल मोर्चों पर सीमित नहीं बल्कि नागरिक जीवन की मूल सुविधाओं को क्षति पहुँचाने तक विस्तारित हो गई है।

