मुंबई/नई दिल्ली: भारत की बहुप्रतीक्षित मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना (MAHSR) ने एक अहम मील का पत्थर पार कर लिया है। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शनिवार को मुंबई के पास शिलफाटा और घान्सोली के बीच लगभग 4.88 किलोमीटर लंबी सुरंग (टनेल) में ब्रेकथ्रू की घोषणा की। इस मौके को उन्होंने “ऐतिहासिक” और “देश की प्रगति का प्रतीक” बताया।
यह उपलब्धि ऐसे समय पर आई है जब लंबे समय से चल रही इस परियोजना की समयसीमा और लागत पर सवाल उठते रहे हैं। अब मंत्रालय का दावा है कि परियोजना का पहला चरण दिसंबर 2027 में सूरत से बिलिमोरा खंड पर शुरू कर दिया जाएगा।
क्या है टनेल ब्रेकथ्रू?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, सुरंग निर्माण में NATM (New Austrian Tunnelling Method) तकनीक का इस्तेमाल किया गया। यह तकनीक खासकर तब प्रयोग की जाती है जब जमीन और चट्टानों की संरचना जटिल होती है।
- सुरंग की आंतरिक चौड़ाई 12.6 मीटर है, जिसमें दोहरी लाइन बिछाई जाएगी।
- सुरंग से दो बुलेट ट्रेनें एक साथ गुजर सकेंगी।
- निर्माण कार्य मई 2024 से शुरू हुआ था और इसे तीन चरणों में पूरा किया गया।
- जुलाई 2025 में सुरंग का पहला बड़ा भाग पूरा हुआ था, जबकि अब अंतिम ब्रेकथ्रू हासिल कर लिया गया है।
मंत्री वैष्णव का बयान
अश्विनी वैष्णव ने कहा:
“यह केवल एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारत की क्षमताओं का प्रमाण है। यह परियोजना 2027 में यात्रियों के लिए खुल जाएगी और धीरे-धीरे अन्य खंड भी जुड़ते जाएंगे।”
उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेन मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर बनाई गई है और इसका किराया “उचित और सुलभ” होगा।
मंत्री ने यह भी बताया कि:
- 2027: सूरत-बिलिमोरा खंड चालू होगा।
- 2028: थाणे तक सेवा बढ़ेगी।
- 2029: मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) तक पूरा रूट चालू करने का लक्ष्य है।
यात्रा समय और सेवाएँ
पूरे कॉरिडोर के चालू होने के बाद मुंबई से अहमदाबाद की दूरी महज़ 2 घंटे 7 मिनट में तय की जा सकेगी। वर्तमान में यही यात्रा कार या ट्रेन से लगभग 9 घंटे लेती है।
- शुरुआत में पीक टाइम पर हर 30 मिनट पर ट्रेनें चलाई जाएँगी।
- भविष्य में, पूरी परियोजना के चालू होने पर, हर 10 मिनट पर एक बुलेट ट्रेन उपलब्ध होगी।
- टिकटिंग प्रणाली लचीली होगी, यात्री बिना आरक्षण भी स्टेशन पर आकर टिकट लेकर यात्रा कर सकेंगे।
परियोजना की प्रगति
- इस परियोजना की कुल लंबाई 508 किलोमीटर है।
- अब तक लगभग 320 किलोमीटर का वायडक्ट (viaduct) और कई सौ पुल, स्तंभ और स्टेशन तैयार हो चुके हैं।
- जापानी तकनीक शिंकानसेन (E10 Series Shinkansen) का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे विश्व में सबसे सुरक्षित और तेज बुलेट ट्रेनों में गिना जाता है।
आर्थिक और सामाजिक महत्व
- क्षेत्रीय विकास: सूरत, वडोदरा, अहमदाबाद और मुंबई जैसे प्रमुख औद्योगिक शहरों को जोड़ने से व्यापार और निवेश के नए अवसर बनेंगे।
- रोज़गार: परियोजना के निर्माण से लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष नौकरियाँ पैदा हुई हैं। संचालन शुरू होने के बाद भी रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
- यातायात का दबाव कम होगा: हवाई और सड़क मार्गों पर भीड़ का बोझ कम होगा।
- पर्यावरणीय लाभ: उच्च गति की इलेक्ट्रिक ट्रेनें प्रदूषण घटाने और कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद करेंगी।
चुनौतियाँ और सवाल
हालाँकि इस उपलब्धि के बावजूद परियोजना के सामने कई चुनौतियाँ अब भी बनी हुई हैं:
- लागत: शुरुआती अनुमान 1.08 लाख करोड़ रुपये का था, लेकिन समय और सामग्री की कीमत बढ़ने से लागत में इज़ाफ़ा हो सकता है।
- भूमि अधिग्रहण: महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भूमि अधिग्रहण को लेकर विरोध हुआ था।
- समयसीमा: शुरुआती लक्ष्य 2023-24 का था, जो अब 2027-29 तक खिसक गया है।
भविष्य की झलक
यह परियोजना पूरी होने पर भारत एशिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल होगा जहाँ बुलेट ट्रेन सेवा उपलब्ध है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह सिर्फ एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि भारत की आधुनिकता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में नई छलांग है।
मंत्री वैष्णव ने दावा किया कि बुलेट ट्रेन देश की अर्थव्यवस्था को कई गुना बढ़ाने में मदद करेगी। उनका कहना है कि यह परियोजना आने वाले वर्षों में देश के लिए “आर्थिक गलियारा” बनेगी।
निष्कर्ष
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना में सुरंग ब्रेकथ्रू की सफलता से यह साफ है कि भारत अपने पहले बुलेट ट्रेन सपने को हकीकत में बदलने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। 2027 में पहले चरण की शुरुआत के साथ देशवासी इतिहास का गवाह बनेंगे, जब भारत में पहली बार शिंकानसेन तकनीक से बनी बुलेट ट्रेन पटरी पर दौड़ेगी।

