नई दिल्ली। अमेरिका द्वारा भारत से आयातित अधिकांश वस्तुओं पर 50% तक शुल्क लगाए जाने के बाद भारत के अमेरिका निर्यात में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त 2025 में भारत का अमेरिका को निर्यात 16.3% घटकर 5.6 अरब डॉलर पर आ गया। यह गिरावट जुलाई 2025 में 8 अरब डॉलर से शुरू हुई थी और लगातार तीसरे महीने निरंतर बनी हुई है।
स्मार्टफोन निर्यात में अप्रत्याशित गिरावट
भारत से अमेरिका को स्मार्टफोन निर्यात, जो कि भारत के सबसे बड़े निर्यात क्षेत्रों में से एक है, में मई 2025 में 2.29 अरब डॉलर से गिरावट दर्ज हुई और अगस्त तक यह घटकर 964.8 मिलियन डॉलर रह गया। यह लगभग 58% की भारी गिरावट है, और सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्मार्टफोन पर कोई शुल्क नहीं लगाया गया है। GTRI ने इस गिरावट को ‘चिंताजनक और अप्रत्याशित’ करार दिया है और इसके पीछे की वजहों की तत्काल जांच की आवश्यकता जताई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट केवल शुल्क वृद्धि का परिणाम नहीं हो सकती, बल्कि अमेरिका में उपभोक्ता मांग में कमी, वैश्विक सप्लाई चेन में बाधाएं और मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव भी इसका कारण हो सकते हैं।
अन्य प्रमुख उत्पादों पर भी असर
स्मार्टफोन के अलावा, भारत से अमेरिका निर्यात किए जाने वाले अन्य प्रमुख उत्पादों जैसे फार्मास्युटिकल्स, समुद्री भोजन, आभूषण, वस्त्र और कालीनों पर भी गहरा असर पड़ा है। अगस्त 2025 में फार्मास्युटिकल्स का निर्यात 647 मिलियन डॉलर पर आ गया, जो कि 13.3% की गिरावट दर्शाता है। समुद्री भोजन का निर्यात 162.7 मिलियन डॉलर पर घट गया, यानी 43.8% की भारी गिरावट। वस्त्र और परिधान का निर्यात 855.5 मिलियन डॉलर पर रहा, जो कि 9.3% कम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट लंबे समय तक बनी रह सकती है, जिससे भारत के निर्यात क्षेत्र और रोजगार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा।
अगस्त में अमेरिका की शुल्क वृद्धि
अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारत के अधिकांश आयातों पर शुल्क को 25% से बढ़ाकर 50% कर दिया। इससे पहले मई में यह 10% था। इस अचानक वृद्धि ने भारतीय निर्यातकों को बिना किसी तैयारी के प्रभावित किया और निर्यात में तेज गिरावट का कारण बना।
विशेष रूप से छोटे और मध्यम उद्योग (SME) जिन्हें अमेरिका में प्रमुख बाजार के रूप में देखा जाता है, उनके लिए यह चुनौती और भी बड़ी साबित हुई। कई उद्योग अब अपने उत्पादन और सप्लाई चेन में बदलाव करने के लिए मजबूर हैं, ताकि लागत और मूल्य में संतुलन बनाए रखा जा सके।
आगे की राह और संभावित प्रभाव
विशेषज्ञों का अनुमान है कि यदि यह स्थिति जारी रहती है, तो भारत 2026 तक अमेरिका को निर्यात में लगभग 30-35 अरब डॉलर का नुकसान झेल सकता है। इससे भारत की जीडीपी में 0.3% से 0.8% तक की कमी आ सकती है। इसके अलावा, रोजगार में गिरावट, उत्पादन लागत में वृद्धि और निवेशकों का भरोसा कमजोर होने जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया और कदम
भारत सरकार ने अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों को सुधारने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत से तनाव को कम करने का प्रयास किया गया है। आर्थिक सलाहकार वी. अनंथा नागेश्वरन ने कहा है कि अमेरिका भारत पर आयात शुल्क को घटाकर 10-15% कर सकता है, लेकिन यह सुधार लंबे समय तक निर्यातकों को राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।
इसके अलावा सरकार ने निर्यातकों को वित्तीय सहायता, टैक्स छूट और सपोर्टिव पॉलिसी के माध्यम से राहत देने के कदम उठाने की भी योजना बनाई है। भारतीय उद्योग समूह भी अमेरिका की नीतियों के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रहे हैं।
निष्कर्ष
अमेरिका द्वारा आयात शुल्क बढ़ाने का असर भारत के निर्यात पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विशेषकर स्मार्टफोन जैसे उत्पाद, जो शुल्क मुक्त हैं, भी अप्रत्याशित रूप से प्रभावित हुए हैं। निर्यातकों को तत्काल समर्थन और दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता है, ताकि रोजगार सुरक्षित रहे और आर्थिक स्थिरता बनी रहे।
इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वैश्विक व्यापार में किसी भी नीति परिवर्तन का भारतीय निर्यात क्षेत्र पर बड़ा असर पड़ सकता है, और इसके लिए समय रहते रणनीतिक कदम उठाना जरूरी है।

