जोहो कॉर्पोरेशन के संस्थापक और सीईओ श्रीधर वेंबु ने हाल ही में स्पष्ट किया है कि जोहो का मैसेजिंग ऐप अरट्टई (Arattai) और बाकी सेवाएँ पूरी तरह से स्वदेशी तकनीक पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि जोहो AWS, Microsoft Azure या Google Cloud जैसी क्लाउड सेवाओं का उपयोग नहीं करता।
वेंबु ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “अरट्टई विशेष रूप से इन वैश्विक क्लाउड प्लेटफॉर्म पर होस्ट नहीं है। हम कुछ सेवाओं का उपयोग करते हैं, लेकिन हमारे उपयोगकर्ता डेटा को इनमें संग्रहित नहीं किया जाता।”
वेंबु ने साझा की तकनीकी रणनीति
वेंबु ने बताया कि जोहो का तकनीकी ढांचा मुख्य रूप से ओपन-सोर्स प्लेटफ़ॉर्म जैसे Linux और Postgres पर आधारित है। इसके अलावा, जोहो के अधिकांश डेटासेंटर भारत में स्थित हैं और पूरी तरह से कंपनी के स्वामित्व वाले हार्डवेयर पर चलाए जाते हैं। उन्होंने इस दृष्टिकोण को “मेड इन इंडिया, मेड फॉर द वर्ल्ड” के रूप में पेश किया।
कंपनी की प्राथमिकता और सुरक्षा
वेंबु ने यह भी स्पष्ट किया कि कंपनी का उद्देश्य डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और नियंत्रण सुनिश्चित करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उपयोगकर्ताओं का डेटा पूरी तरह से भारत में ही सुरक्षित है और इसका प्रबंधन जोहो के नियंत्रण में है।
अरट्टई और जोहो का भविष्य
अरट्टई एक इंडियन मैसेजिंग ऐप है जिसे व्हाट्सएप के प्रतिद्वंद्वी के रूप में पेश किया गया है। जोहो की यह पहल भारत में डिजिटल आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। श्रीधर वेंबु का यह बयान तकनीकी दुनिया में इस बात पर बहस को और भी तीव्र कर सकता है कि क्या भविष्य में वैश्विक क्लाउड प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग किए बिना बड़े पैमाने पर डिजिटल सेवाएँ दी जा सकती हैं।

