नई दिल्ली, 30 सितंबर 2025 — जोहो कॉर्पोरेशन के संस्थापक और सीईओ श्रीधर वेंबु ने हाल ही में एक स्पष्ट संदेश देते हुए कहा है कि उनकी कंपनी का मैसेजिंग ऐप अरट्टै (Arattai) कभी भी एकाधिकार (Monopoly) बनने का लक्ष्य नहीं रखता। यह बयान उन्होंने तकनीकी क्षेत्र में बढ़ते प्रतिस्पर्धा और प्लेटफॉर्म स्वतंत्रता के महत्व को रेखांकित करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल एक मैसेजिंग एप बनाना नहीं है, बल्कि एक ऐसा खुला और इंटरऑपरेबल प्लेटफ़ॉर्म तैयार करना है जो उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता, सुरक्षा और स्वतंत्रता को प्राथमिकता देता है।
अरट्टै की बढ़ती लोकप्रियता
अरट्टै, जो जोहो द्वारा विकसित एक भारतीय मैसेजिंग ऐप है, हाल ही में भारत में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लॉन्च के केवल कुछ ही दिनों में इसके डाउनलोड और सक्रिय उपयोगकर्ताओं में अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई है। यह ऐप व्हाट्सऐप का एक मजबूत विकल्प बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, खासकर उन उपयोगकर्ताओं के बीच जो डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को लेकर चिंतित हैं।
वेंबु ने बताया कि अरट्टै का डिज़ाइन उपयोगकर्ता-केंद्रित है और इसमें कुछ ऐसे अनोखे फीचर्स शामिल हैं जो अन्य मैसेजिंग प्लेटफॉर्म पर नहीं मिलते। जैसे कि ‘Meetings’ फीचर, जो यूज़र्स को नई मीटिंग शेड्यूल करने और उन्हें रिकॉर्ड करने की सुविधा देता है। इसके अलावा ‘Pocket’ फीचर उपयोगकर्ताओं को व्यक्तिगत नोट्स, ड्राफ्ट और महत्वपूर्ण जानकारी स्टोर करने की क्षमता प्रदान करता है।
UPI की तर्ज पर इंटरऑपरेबिलिटी
वेंबु ने स्पष्ट किया कि अरट्टै का अगला लक्ष्य इसे एक इंटरऑपरेबल प्लेटफॉर्म बनाना है, ठीक वैसे ही जैसे Unified Payments Interface (UPI) भारतीय भुगतान प्रणाली में सफलता का प्रतीक बन चुका है। उनका मानना है कि मैसेजिंग तकनीक में भी इसी तरह का मानकीकरण होना चाहिए, ताकि उपयोगकर्ता किसी भी प्लेटफॉर्म से जुड़े बिना संदेश भेजने और प्राप्त करने में सक्षम हों।
उन्होंने कहा कि इसके लिए अरट्टै टीम iSpirt के साथ मिलकर मैसेजिंग प्रोटोकॉल को मानकीकृत करने की दिशा में काम कर रही है। इस कदम से यह सुनिश्चित होगा कि अरट्टै केवल एक एप्लिकेशन नहीं, बल्कि एक स्वतंत्र और खुले मानक वाला इकोसिस्टम बन सके।
डेटा सुरक्षा और गोपनीयता पर जोर
वेंबु ने जोर देकर कहा कि जोहो डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जोहो AWS, Azure या Google Cloud जैसी बाहरी क्लाउड सेवाओं पर निर्भर नहीं है और अधिकांश डेटा का प्रबंधन जोहो के अपने सुरक्षित सर्वर पर किया जाता है। उनका यह दृष्टिकोण उपयोगकर्ताओं के लिए यह आश्वासन देता है कि उनका डेटा भारतीय कानून और गोपनीयता मानकों के अनुसार सुरक्षित रहेगा।
व्हाट्सऐप से अलग दृष्टिकोण
वेंबु का यह बयान तकनीकी दुनिया में एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म देता है — क्या भविष्य में मैसेजिंग सेवाएं बड़े ग्लोबल क्लाउड प्रदाताओं पर निर्भर हुए बिना भी सफल हो सकती हैं। अरट्टै अपने यूज़र-केंद्रित फीचर्स, खुली संरचना और इंटरऑपरेबिलिटी दृष्टिकोण के साथ इस दिशा में एक नया उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।
वेंबु ने स्पष्ट किया कि उनका लक्ष्य एक ऐसे प्लेटफॉर्म का निर्माण करना है जो उपयोगकर्ताओं को स्वतंत्रता, सुरक्षा और नियंत्रण प्रदान करे, न कि एकाधिकार स्थापित करे। इस दृष्टिकोण के पीछे उनका उद्देश्य केवल व्यवसाय नहीं है, बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता और भारतीय प्रौद्योगिकी में योगदान करना है।
भविष्य की दिशा
अरट्टै का यह कदम भारतीय डिजिटल परिदृश्य में एक नई लहर ला सकता है। यदि यह दृष्टिकोण सफल होता है, तो यह न केवल भारत में मैसेजिंग तकनीक के लिए एक नया मानक स्थापित करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा कि कैसे एक स्वदेशी प्लेटफॉर्म स्वतंत्र, सुरक्षित और प्रभावी रूप से विकसित किया जा सकता है।
श्रीधर वेंबु के इस बयान ने स्पष्ट कर दिया है कि अरट्टै केवल एक मैसेजिंग ऐप नहीं है — यह भारत के डिजिटल आत्मनिर्भरता आंदोलन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

