News

कफ सिरप से जुड़ी मौतों पर जांच तेज, SIT गठित और कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज

नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2025 — मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में कथित रूप से दूषित कफ सिरप के सेवन से 14 बच्चों की मौत के बाद प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है और संबंधित दवा निर्माता कंपनी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है।


मामला क्या है

पिछले कुछ दिनों में जिले के विभिन्न इलाकों से बच्चों की तबीयत बिगड़ने और मृत्यु की खबरें आई थीं। शुरुआती जांच में पाया गया कि बच्चों ने एक ही ब्रांड का कफ सिरप पीया था। प्रयोगशाला परीक्षण में इस सिरप में विषैले रसायन डायथिलीन ग्लाइकॉल (Diethylene Glycol) की अत्यधिक मात्रा पाई गई, जो मानव शरीर के लिए घातक मानी जाती है।

बताया जा रहा है कि प्रभावित बच्चों की उम्र पांच साल से कम थी और अधिकतर की मौत गुर्दे फेल होने (Acute Kidney Failure) की वजह से हुई।


कंपनी और डॉक्टर पर कार्रवाई

पुलिस ने Sresan Pharma नामक कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। साथ ही, एक स्थानीय बाल रोग विशेषज्ञ डॉक्टर को भी हिरासत में लिया गया है, जिन पर संदिग्ध दवा के उपयोग का आरोप है।

कंपनी पर हत्या के समान अपराध (Culpable Homicide), दवाओं में मिलावट, और Drugs and Cosmetics Act की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।


SIT की जांच

राज्य सरकार ने 12 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। यह टीम कंपनी के उत्पादन स्थलों और वितरण चैनल की जांच करेगी। टीम को यह पता लगाने का निर्देश दिया गया है कि दवा की गुणवत्ता जांच में खामी कहां हुई और क्या अन्य बैच भी दूषित थे।

साथ ही, मृत बच्चों के शवों का पोस्टमॉर्टम और फॉरेंसिक जांच फिर से कराई जा रही है ताकि मौत के असली कारण की पुष्टि हो सके।


प्रशासनिक कदम

राज्य सरकार ने इस घटना के बाद Coldrif नामक सिरप की बिक्री पर तत्काल रोक लगा दी है। साथ ही, दवा नियंत्रक अधिकारी सहित कई अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है।

सरकार ने मृत बच्चों के परिजनों को चार लाख रुपये मुआवजे की घोषणा की है और अन्य प्रभावित बच्चों के उपचार का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी ली है।


चिंता और प्रतिक्रिया

यह घटना भारत के औषधि उद्योग में गुणवत्ता नियंत्रण और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि फार्मास्यूटिकल कंपनियों को सख्त मानकों के तहत परीक्षण प्रक्रिया अपनानी चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय ने देशभर में बाल चिकित्सा दवाओं की व्यापक जांच के आदेश जारी किए हैं।


निष्कर्ष

छिंदवाड़ा की यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है कि दवा निर्माण और वितरण प्रक्रिया में जरा सी लापरवाही भी कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकती है। जांच जारी है, और उम्मीद है कि दोषियों को जल्द सख्त सजा मिलेगी ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *