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“21वीं सदी भारत की सदी होगी, 2047 तक बनाएंगे विकसित भारत” — प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि 21वीं सदी भारत की सदी होगी, और देश वर्ष 2047 तक एक विकसित भारत (Viksit Bharat) के रूप में दुनिया के सामने खड़ा होगा। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में जिस गति से प्रगति की है, वह इस बात का प्रमाण है कि देश अब आत्मविश्वास और संकल्प के साथ विश्व नेतृत्व की दिशा में अग्रसर है।

उन्होंने कहा कि जब भारत अपनी आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब तक देश आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक रूप से इतना सशक्त होगा कि वह “विकसित राष्ट्रों” की श्रेणी में अग्रणी होगा। प्रधानमंत्री ने कहा,

“आज का भारत सपनों को केवल देखने वाला देश नहीं, बल्कि उन्हें साकार करने की ताकत रखता है। आने वाला समय भारत का है — और यह सदी भारत की सदी बनेगी।”


विकसित भारत 2047 का संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य केवल आर्थिक समृद्धि तक सीमित नहीं है। यह एक समावेशी और सतत विकास मॉडल पर आधारित है, जहाँ हर वर्ग, हर राज्य और हर व्यक्ति को विकास की यात्रा में शामिल किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि सरकार का उद्देश्य एक ऐसे भारत का निर्माण करना है जहाँ –

  • प्रत्येक नागरिक के पास सम्मानजनक जीवन और अवसर हों,
  • शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार सभी के लिए सुलभ हों,
  • तकनीक और नवाचार से ग्रामीण भारत को भी नई दिशा मिले,
  • और महिलाएँ देश की प्रगति में बराबर की भागीदार बनें।

प्रधानमंत्री ने कहा कि “विकसित भारत 2047” केवल एक नारा नहीं, बल्कि 130 करोड़ भारतीयों का साझा सपना है जिसे सबको मिलकर साकार करना है।


भारत की वैश्विक भूमिका पर जोर

मोदी ने कहा कि आज भारत न केवल दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, बल्कि वैश्विक नीति, तकनीक और मानवता के मुद्दों पर भी एक मार्गदर्शक शक्ति बन चुका है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की युवा जनसंख्या, डिजिटल क्षमता और आत्मनिर्भरता की सोच आने वाले वर्षों में उसे विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल करेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत अब “रिसीविंग नेशन” नहीं बल्कि “गिविंग नेशन” बन चुका है — एक ऐसा देश जो न सिर्फ अपने लिए, बल्कि पूरी दुनिया के कल्याण के लिए कार्य कर रहा है।

“भारत आज दुनिया के सामने एक नई सोच लेकर खड़ा है — शांति, प्रगति और साझेदारी की सोच। यही हमारी सभ्यता की आत्मा है और यही हमें भविष्य की दिशा दिखाती है,” प्रधानमंत्री ने कहा।


युवा शक्ति और नवाचार पर भरोसा

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से देश के युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी युवा ऊर्जा है। उन्होंने कहा कि भारत के युवा अब केवल नौकरी खोजने वाले नहीं, बल्कि नवाचार करने वाले और रोजगार सृजन करने वाले बन रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि हर युवा को शिक्षा, कौशल और अवसर मिले ताकि वे देश को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकें।

मोदी ने यह भी जोड़ा कि भारत का “स्टार्टअप इकोसिस्टम” और “डिजिटल इंडिया” कार्यक्रम देश को तकनीकी रूप से सशक्त बना रहा है और यही विकसित भारत की नींव है।


विकास के मार्ग पर दृढ़ कदम

प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते वर्षों में भारत ने इन्फ्रास्ट्रक्चर, अंतरिक्ष विज्ञान, रक्षा, ऊर्जा, कृषि और डिजिटल सेवाओं में ऐतिहासिक प्रगति की है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों में यह प्रगति और तेज होगी।

उन्होंने विश्वास जताया कि “भारत अगले 25 वर्षों में न केवल आत्मनिर्भर होगा, बल्कि दुनिया के लिए विकास का मॉडल बनेगा।”

“हमारा संकल्प है — 2047 तक ऐसा भारत बनाना जो आधुनिक भी हो और अपनी परंपराओं से भी जुड़ा रहे। जहाँ हर व्यक्ति के पास अवसर हो, हर समाज का उत्थान हो, और हर नागरिक को गर्व महसूस हो कि वह भारतीय है।”


अंतिम संदेश

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण का समापन करते हुए कहा कि भारत अब रुकने वाला नहीं है
उन्होंने कहा कि आने वाले दशक भारत के इतिहास को नई दिशा देंगे, और यदि देशवासी एकजुट रहकर कार्य करें, तो “विकसित भारत 2047” का सपना निश्चित रूप से साकार होगा।

“यह सदी भारत की सदी है — क्योंकि भारत के पास न केवल क्षमता है, बल्कि प्रतिबद्धता और संस्कृति भी है जो पूरी दुनिया को साथ लेकर चल सकती है,” प्रधानमंत्री ने कहा।

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