नई दिल्ली: वैश्विक बाजारों में आर्थिक और नीतिगत उतार-चढ़ाव के बीच इस सप्ताह सोने की कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। विश्लेषकों का कहना है कि निकट अवधि में सोने की कीमतों के लिए ऊपरी स्तरों पर रेसिस्टेंस (प्रतिरोध) बना रह सकता है, जिसके कारण तेज उछाल की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।
क्यों रुक रही है सोने की तेजी?
- डॉलर की मजबूती: अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर मजबूत होने पर सोने की मांग थोड़ी कमजोर पड़ जाती है, जिससे सोने की कीमतों पर दबाव आता है।
- ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता: प्रमुख केंद्रीय बैंकों द्वारा ब्याज दरों में आगे क्या कदम उठाया जाएगा, इसको लेकर बाजार में स्पष्ट संकेत नहीं हैं। यह निवेशकों को सतर्क बनाता है।
- चीन में मांग कमजोर: चीन में सोने की मांग में हाल के दिनों में गिरावट देखने को मिली है, जिससे वैश्विक मांग पर असर पड़ा है।
भारत में सोने का बाजार
भारत में सोना अभी भी ऊँचे स्तरों पर कारोबार कर रहा है। 10 ग्राम सोने की दरें घरेलू बाजार में ऊँचाई के पास बनी हुई हैं। हालांकि, कीमतों में ऊपर की ओर बढ़ने पर ₹1,23,000 से ₹1,24,500 प्रति 10 ग्राम के आसपास मजबूत रेसिस्टेंस माना जा रहा है।
वहीं, नीचे की ओर ₹1,18,000 के आसपास मजबूत सपोर्ट देखा जा रहा है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि सोने में निवेश करने वाले निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और कीमतों के स्थिर होने तक इंतज़ार करना बेहतर हो सकता है।
- लंबी अवधि के निवेशकों के लिए सोना अभी भी सुरक्षित विकल्प माना जाता है।
- कम अवधि के ट्रेडिंग वाली रणनीतियाँ सावधानी के साथ अपनाई जानी चाहिए।
- सोने में धीरे-धीरे निवेश (SIP या चरणबद्ध खरीद) को बेहतर रणनीति बताया जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है?
सोने की दिशा आने वाले दिनों में निम्न कारकों पर निर्भर करेगी:
- वैश्विक आर्थिक आँकड़ों की घोषणा
- प्रमुख देशों की ब्याज दरों पर नीतिगत फैसले
- डॉलर इंडेक्स की चाल
- भू-राजनीतिक तनावों में बदलाव
अगर वैश्विक अनिश्चितता बढ़ती है, तो सोने में फिर से तेज बढ़त देखने को मिल सकती है। वहीं, आर्थिक स्थिरता के संकेत मिलने पर सोने की कीमतें सीमित दायरे में ही रह सकती हैं।
निष्कर्ष
निकट अवधि में सोना सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है और ऊपर की ओर महत्वपूर्ण स्तरों पर रेसिस्टेंस का सामना करेगा। निवेशकों के लिए यह समय सतर्क रणनीति अपनाने का है — विशेषकर उन लोगों के लिए जो कम समय में तेज लाभ की उम्मीद कर रहे हैं।

