Groww के शेयरों में तेज़ उछाल के बाद मार्केट में बड़ी हलचल देखने को मिली है। शेयर की तेजी और कम उपलब्धता के कारण कई शॉर्ट-सेलर्स डिलीवरी देने में असफल रहे, जिसकी वजह से लगभग 30.8 लाख शेयर नीलामी (Auction Window) में चले गए।
क्या हुआ?
- Groww की लिस्टिंग के बाद उसके शेयर में तेज़ उछाल दर्ज हुआ।
- मार्केट में उपलब्ध शेयरों (फ्री-फ्लोट) की मात्रा बहुत कम है — करीब सिर्फ 7%।
- कई ट्रेडर्स ने शेयर गिरने की उम्मीद में शॉर्ट-सेल किया, लेकिन उपलब्ध शेयर कम होने के कारण वे डिलीवरी नहीं कर पाए।
- नतीजतन, उनके शॉर्ट पोज़िशन नीलामी में चला गया।
शॉर्ट-स्क्वीज़ कैसे बना संकट?
- तेज़ी के चलते शॉर्ट-सेलर्स मजबूर हुए कि वे ऊँचे दामों पर शेयर खरीदें।
- लेकिन बाज़ार में शेयर कम होने के कारण खरीदना और मुश्किल हो गया।
- यही स्थिति “शॉर्ट-स्क्वीज़” कहलाती है — जब शॉर्ट-सेलर्स बड़ी कीमत पर शेयर खरीदने को मजबूर होते हैं।
भारी पेनल्टी का खतरा
- नीलामी में खरीदे गए शेयरों की कीमत अक्सर बाज़ार मूल्य से अधिक होती है।
- जिसकी वजह से डिफॉल्टरों (जो डिलीवरी नहीं दे पाए) को भारी जुर्माना देना पड़ता है।
- अनुमान है कि कुछ मामलों में 20% से 25% तक की पेनल्टी लग सकती है।
विशेषज्ञों की राय
- मार्केट विश्लेषकों ने इसे “लालच की भारी कीमत” बताया है।
- कई ट्रेडर्स ने तेज़ी से हुए T+1 सेटलमेंट साइकिल को हल्के में लिया, जो उनके लिए नुकसानदायक साबित हुआ।
- यह घटना बताती है कि कम फ्री-फ्लोट वाले स्टॉक्स में शॉर्ट-सेलिंग बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
आगे क्या?
- नीलामी पूरी होने के बाद शेयर की कीमत में स्थिरता आ सकती है।
- लेकिन यह घटना निवेशकों के लिए एक बड़ा सबक छोड़ती है —
उच्च जोखिम वाले, कम उपलब्धता वाले स्टॉक्स में शॉर्ट-सेलिंग सोच-समझकर करें।

