नई दिल्ली — भारत में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में अक्टूबर 2025 के दौरान सालाना आधार पर 4.6% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस महीने सरकार ने कुल ₹1.96 लाख करोड़ का जीएसटी राजस्व एकत्र किया। यह वृद्धि ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में कई वस्तुओं और सेवाओं पर कर दरों में कटौती की गई थी।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, यह लगातार कई महीनों से दूसरा मौका है जब जीएसटी संग्रह ₹1.90 लाख करोड़ से ऊपर रहा है। हालांकि, पिछले कुछ महीनों की तुलना में वृद्धि की गति थोड़ी धीमी रही है।
मुख्य बिंदु
- अक्टूबर 2025 में कुल जीएसटी संग्रह ₹1.96 लाख करोड़ रहा।
- पिछले वर्ष की तुलना में संग्रह में 4.6% की वृद्धि दर्ज हुई।
- कर दरों में कटौती के बावजूद सरकार का राजस्व स्थिर रहा।
- त्योहारों के सीजन के दौरान बढ़ी उपभोक्ता मांग ने संग्रह में सहारा दिया।
क्या बताता है यह रुझान
विशेषज्ञों के अनुसार, यह आंकड़े दर्शाते हैं कि कर सुधारों और दरों में कमी के बाद भी अर्थव्यवस्था में उपभोग की स्थिति मजबूत बनी हुई है।
त्योहारों के समय मांग में वृद्धि के कारण बाजारों में बिक्री बढ़ी, जिससे जीएसटी राजस्व पर सकारात्मक असर पड़ा। हालांकि, वृद्धि दर में मामूली गिरावट से संकेत मिलता है कि आने वाले महीनों में सरकार को राजस्व वृद्धि को बनाए रखने के लिए और रणनीति अपनानी पड़ सकती है।
आगे की चुनौतियाँ
- कर दरों में कटौती का दीर्घकालिक असर राजस्व पर देखने को मिल सकता है।
- राज्यों की हिस्सेदारी और केंद्र-राज्य राजस्व संतुलन को ध्यान में रखना होगा।
- अनुपालन (Compliance) को और मजबूत करने की आवश्यकता होगी ताकि टैक्स चोरी या देरी की संभावनाएं कम हों।
निष्कर्ष
अक्टूबर में 4.6% की वृद्धि के साथ ₹1.96 लाख करोड़ का जीएसटी संग्रह भारत की आर्थिक स्थिरता का संकेत है। यह दर्शाता है कि उपभोग आधारित अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत है और सरकार के कर सुधारों के बावजूद राजस्व में स्थायित्व बना हुआ है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जीएसटी संग्रह की यह रफ्तार कितनी बनाए रखी जा सकती है।

